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Friday, 22 July 2011

फाजिल्का में मिटी अमेरिकी की जिज्ञासा

एशियाई देशों में सूचना तकनीक के साथ परंपरागत यातायात के साधनों का भी विकास हुआ है। यह विकास कैसे किया गया? इसमें नया क्या किया जा सकता है? इस बारे में रिसर्च के लिए मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अमेरिका (एमआईटी) में डाक्टरेट की उपाधी के लिए रिसर्च कर रहे एल्बर्ट चिंग फाजिल्का पहुंचे। उन्होंने रविवार को ग्रेजुएट्स वेलफेयर एसोसिएशन फाजिल्का की ओर से शुरू की गई डायल-ए-रिक्शा यानि ईको कैब और नगर कौंसिल के सहयोग से घंटाघर बाजार को बनाया गया कार फ्री जोन को देखा व ईको कैब सदस्यों के साथ अपने अनुभव साझे किए।
इसके अलावा उन्होंने नगर कौंसिल प्रधान अनिल सेठी से भेंट की व देर सायं सरहद की सादकी चौकी पर होने वाली रिट्रीट सेरेमनी का लुत्फ उठाया। उनके साथ गवफ संरक्षक डॉक्टर भूपिंद्र सिंह, सचिव नवदीप असीजा आदि भी मौजूद थे। असीजा के बताए अनुसार एल्बर्ट चिंग रिसर्च कर रहे हैं कि एशियाई देशों में किस तरह परंपरागत यातायात के साधन, जैसेकि रिक्शा को सूचना तकनीक के साथ जोड़कर मौजूदा समय की जरूरतों को पूरा किया जा रहा है। पुराने एशियाई शहरों में रिक्शा ही एक ऐसा पर्याप्त यातायात का साधन है, जिससे तंग गलियों व पुराने शहरों के अंदर तक जाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वह फाजिल्का की रिपोर्ट एमआईटी में जमा करवाएंगे।यह जानना चाहते हैं चिंग
रविवार को फाजिल्का पहुंचे एल्बर्ट चिंग कर रहे हैं मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अमेरिका (एमआईटी) में डाक्टरेट की उपाधि।
रिसर्च : एशियाई देशों में सूचना तकनीकी के साथ यातायात के परंपरागत साधनों का भी विकास हुआ है। यह विकास कैसे किया गया? इसमें क्या नया किया जा सकता है।

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